जीवाणुओं – विषाणुओं का महाभारत में उल्लेख

जीवाणुओं – विषाणुओं का महाभारत में उल्लेख .

Bacteria – Viruses mentioned in The Mahabharata

अवध्यः सर्वब्रह्मभूता अन्तरात्मा न संशयः
अवध्ये चात्मनि कथं वध्यॊ भवति केन चित !!१!!
यथा हि पुरुषः शालां पुनः संप्रविशेन नवाम
एवं जीवः शरीराणि तानि तानि परपद्यते !!२!!
देहान पुराणान उत्सृज्य नवान संप्रतिपद्यते
एवं मृत्युमुखं पराहुर ये जनास कर्मफलर्दर्शिनः !!३!!


ये चल एवं अचल ब्रह्माण्ड सभी प्रकार के प्राणियों के लिए भोजन उपलब्ध कराता है, ये व्यवस्था श्रीहरि द्वारा विहित (Prescribe) की गयी है! प्रतिदिन महान लोगो द्वारा भी सूक्ष्म प्राणियों का वध होता है, परन्तु इनका पाप उन्हें नहीं लगता, फलों में, जल में, पूरी पृथ्वी पर असंख्य छोटे जीव होते हैं, अतः हम ये नहीं कह सकते की उनका वध दिन-प्रतिदिन नहीं हो रहा है, ये परमात्मा की आज्ञा है, ये उन जीवों का कर्म फल है, एक दृष्टि में ये लग सकता है की क्या योगिओं को उनके जीवन का समर्थन करना चाहिए? वे प्राणी तो हमारी पलकों के गिरने के साथ ही अपने प्राण त्याग देते है, परन्तु जैसे मैंने कहा की वे इस तरह कर्म फल भोगते हैं!

वैसे मैं बता दूँ की बाईबल का आरम्भ ही ऐसे आयतों के साथ हुआ है “आरम्भ में ईश्वर ने आकाश और पृथ्वी को सृजा. और पृथ्वी बेडौल और सूनी थी और गहराव पर अँधियारा था और ईश्वर का आत्मा जल के उपर डोलता था.” तौरेत उत्पत्ति पुस्तक, पर्व १, आयात १/२
इसलिए मैं आपको सनातनी ग्रंथों के अध्ययन के आधार पर निश्चिन्त करना चाहता हूँ की अगले सप्ताह क्या अगले सात सौ वर्षों तक भी ऐसा कुछ नहीं होने वाला है. और यह भी की भारत आकर भारत के सनातनी ग्रंथों के अध्ययन के पूर्व के यूरोपीय इतिहास को उठाकर देख लीजिए यानि १५०० ईस्वी के पहले का इतिहास में ऐसे ही तथाकथित जेंटलमैन और बुद्धिजीवी मुर्ख भरे पड़े नजर आयेंगे.
ईसाई धर्म के कुछ अनुयायियों के अनुसार इस हफ्ते यानी 22-28 सितंबर के बीच धरती कभी भी खत्म हो सकती है. इस भविष्यवाणी का आधार है बाइबल में उल्लेखित ब्लड मून की संकल्पना-दैनिक जागरण
पिछले साल अप्रैल से अब तक चंद्रमा का रंग चार बार लाल हो चुका है, जो 28 सितंबर को पूरी तरह से लाल हो जाएगा. इसके बाद धरती पर भयानक भूकंप आएंगे और आसमान से उल्का पिंडों की बारिस होगी. जो ईसा मसीह के धरती पर आने की सूचना देंगे. ये वो समय होगा, जब धरती पर भयानक भूकंप के झटके होंगे, जो अरब देशों में युद्ध की स्थिति पैदा कर तीसरे विश्वयुद्ध की ओर धकेल देगी. यह दावा मार्क ब्लिज्ट और जॉन हेगी नाम के अमरीकी ईसाई संतों ने की है. इसाई पादरी जॉन हेगी ने तो आपदा की भविष्यवाणी पर ‘फोर ब्लड मून’ नाम से एक किताब भी लिखी है जो 2013 में प्रकाशित हुई थी. इस किताब ने बिक्री के कई रिकॉर्ड भी तोड़े.
यही नहीं, बाईबल पढ़ने वाला एक वैज्ञानिक भी पगला गया है और इसे सच होने का दावा कर रहा है. प्रोफेसर रॉबर्ट वॉल्श का कहना है कि अगले हफ्ते धरती से एक ऐसा उल्का पिंड टकरा सकता है जो धरती पर जीवन को समाप्त कर दे. मिरर में छपी खबर के अनुसार वॉल्श का कहना है कि जो हस्र डायनासोर का हुआ वह इंसानो का भी हो सकता है. ऐसा भी नहीं है कि यह संभावना दूर भविष्य की है. कुछ शंकालु ईसाई एक्सपर्टों की आशंका अगर सच साबित होती है तो 22 से 28 सितंबर के बीच कभी भी धरती का आखिरी दिन हो सकता है. उनके अनुसार हमारे ग्रह पर कई तरह की विपत्तियां टूटने वाली हैं. इनमें उल्का पिंड का धरती से टकराना, भूकंप, सुनामी आदी शामिल हैं.