इतिहास के ये सात व्यक्ति आज भी जिन्दा है

श्लोक : ‘अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः नमो नमः॥’
अर्थात् : अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सभी चिरंजीवी हैं, इन्हें नमस्कार है।
1. बलि : राजा बलिके दानके चर्चे दूर-दूर तक थे। देवताओं पर चढ़ाई करके राजा बलिने इंद्रलोक पर अधिकार कर लिया था। बलि सतयुगमें भगवान वामन अवतारके समय हुए थे। राजा बलिके घमंडको चूर करनेके लिए भगवानने ब्राह्मणका भेष धारण कर राजा बलिसे तीन पग धरती दानमें माँगी थी। राजा बलिने कहा कि जहाँ आपकी इच्छा हो तीन पैर रख दो। तब भगवानने अपना विराट रूप धारण कर दो पगोंमें तीनों लोक नाप दिए और तीसरा पग बलिके सर पर रखकर उसे पाताल लोक भेज दिया।
2. परशुराम : परशुराम रामके कालके पूर्व महान ऋषि रहे हैं। उनके पिताका नाम जमदग्नि और माताका नाम रेणुका है। पति परायणा माता रेणुकाने पाँच पुत्रों को जन्म दिया, जिनके नाम क्रमशः वसुमान, वसुषेण, वसु, विश्वावसु तथा राम रखे गए। रामकी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवान शिवने उन्हें फरसा दिया था इसीलिए उनका नाम परशुराम हो गया। भगवान परशुराम रामके पूर्व हुए थे, लेकिन वे चिरंजीवी होनेके कारण रामके कालमें भी थे। भगवान परशुराम विष्णुके छठवें अवतार हैं। इनका प्रादुर्भाव वैशाख मासके शुक्ल पक्षकी तृतीया को हुआ, इसलिए उक्त तिथि अक्षय तृतीया कहलाती है। इनका जन्म समय सतयुग और त्रेताका संधिकाल माना जाता है।
3. हनुमान : अंजनीपुत्र हनुमानजीको भी अजर अमर रहने का वरदान मिला हुआ है। यह रामके कालमें राम भगवानके परम भक्त रहे हैं। हजारों वर्षों बाद वे महाभारत कालमें भी नजर आते हैं। महाभारतमें प्रसंग हैं कि भीम उनकी पूँछको मार्गसे हटानेके लिए कहते हैं तो हनुमानजी कहते हैं कि तुम ही हटा लो, लेकिन भीम अपनी पूरी ताकत लगाकर भी उनकी पूँछ नहीं हटा पाता है।
4. विभिषण : रावणके छोटे भाई विभिषण। जिन्होंने राम-नाम की महिमा जपकर अपने भाईके विरु‍द्ध लड़ाईमें उनका साथ दिया और जीवनभर राम-नाम जपते रहें।
5. ऋषि व्यास : महाभारतकार व्यास ऋषि पराशर एवं सत्यवतीके पुत्र थे, ये साँवले रंगके थे तथा यमुनाके बीच स्थित एक द्वीपमें उत्पन्न हुए थे। अतएव ये साँवले रंगके कारण ‘कृष्ण’ तथा जन्मस्थानके कारण ‘द्वैपायन’ कहलाए। इनकी माताने बादमें शान्तनुसे विवाह किया, जिनसे उनके दो पुत्र हुए, जिनमें बड़ा चित्रांगद युद्धमें मारा गया और छोटा विचित्रवीर्य संतानहीन मर गया। कृष्ण द्वैपायनने धार्मिक तथा वैराग्यका जीवन पसंद किया, किन्तु माताके आग्रह पर इन्होंने विचित्रवीर्य की दोनों सन्तानहीन रानियों द्वारा नियोगके नियमसे दो पुत्र उत्पन्न किए जो धृतराष्ट्र तथा पाण्डु कहलाए, इनमें तीसरे विदुर भी थे। व्यासस्मृतिके नामसे इनके द्वारा प्रणीत एक स्मृतिग्रन्थ भी है। भारतीय वांड्मय एवं हिन्दू-संस्कृति व्यासजी की ऋणी है।
6. अश्वत्थामा : अश्वथामा गुरु द्रोणाचार्यके पुत्र हैं। अश्वस्थामाके माथे पर अमरमणि है और इसीलिए वह अमर हैं, लेकिन अर्जुनने वह अमरमणि निकाल ली थी। ब्रह्मास्त्र चलानेके कारण कृष्णने उन्हें शाप दिया था कि कल्पांततक तुम इस धरती पर जीवित रहोगे, इसीलिए अश्वत्थामा सात चिरन्जीवियों में गिने जाते हैं। माना जाता है कि वे आज भी जीवित हैं तथा अपने कर्मके कारण भटक रहे हैं। हरियाणाके कुरुक्षेत्र एवं अन्य तीर्थोंमें यदा-कदा उनके दिखाई देनेके दावे किए जाते रहे हैं। मध्यप्रदेशके बुरहानपुरके किलेमें उनके दिखाई दिए जानेकी घटना भी प्रचलित है।
7. कृपाचार्य : शरद्वान् गौतमके एक प्रसिद्ध पुत्र हुए हैं कृपाचार्य। कृपाचार्य अश्वथामाके मामा और कौरवोंके कुलगुरु थे। शिकार खेलते हुए शांतनुको दो शिशु प्राप्त हुए। उन दोनोंका नाम कृपी और कृप रखकर शांतनुने उनका लालन-पालन किया। महाभारत युद्धमें कृपाचार्य कौरवोंकी ओर से सक्रिय थे।