vashikaran mantra

जानिए पौराणिक काल के 24 चर्चित श्राप और उनके पीछे की कहानी

हिन्दू पौराणिक ग्रंथो में अनेको अनेक श्रापों का वर्णन मिलता है। हर श्राप के पीछे कोई न कोई कहानी जरूर मिलती है। आज हम आपको हिन्दू धर्म ग्रंथो में उल्लेखित 24 ऐसे ही प्रसिद्ध श्राप और उनके पीछे की कहानी बताएँगे। 1. युधिष्ठिर का स्त्री जाति को श्राप महाभारत के शांति पर्व के अनुसार युद्ध
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हिन्दू परम्पराएं और उनके वैज्ञानिक कारण

वैसे तो ये सब चीजे हमारे आस पास होती ही रहती है पर फिर भी हम सब ये नही जानते की इनके पीछे क्या कारण है हिन्दू संस्कृति कोई अंधविस्वास पर नही टिकी है इसको विज्ञानिको ने भी सही माना है.ये संस्कृति लाखो हजारो वर्षो से चली आ रही है और आगे भी चलती रहेगी
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इतिहास के ये सात व्यक्ति आज भी जिन्दा है

श्लोक : ‘अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः नमो नमः॥’ अर्थात् : अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सभी चिरंजीवी हैं, इन्हें नमस्कार है। 1. बलि : राजा बलिके दानके चर्चे दूर-दूर तक थे। देवताओं पर चढ़ाई करके राजा बलिने इंद्रलोक पर अधिकार कर लिया था। बलि सतयुगमें भगवान
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जानिए वशीकरण ध्यान से वशीकरण कैसे करें ?

वशीकरण ध्यान (Meditation) में दुनिया को बदलने कि क्षमता होती है! १९७२ में अमेरिका के ११ शहरों में एक प्रयोग किया गया था, ये प्रयोग तीन सप्ताह तक चला था, इसमें ७००० स्वयंसेवकों ने भाग लिया था, इसके चमत्कारिक परिणाम को दुनिया “महर्षि प्रभाव” या “Maharishi Effect” के नाम से जानती है! ये नाम महर्षि
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जानिए आर्यावर्त की महान सती सुलोचना के बारे में कुछ रोचक बातें

सुलोचना वासुकी नाग की पुत्री और लंका के राजा रावण के पुत्र मेघनाद की पत्नी थी। लक्ष्मण के साथ हुए एक भयंकर युद्ध में मेघनाद का वध हुआ। उसके कटे हुए शीश को भगवान श्रीराम के शिविर में लाया गया था। अपने पती की मृत्यु का समाचार पाकर सुलोचना ने अपने ससुर रावण से राम
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इन जगहों का जिक्र रामायण में भी है

इन जगहों का जिक्र रामायण में भी है। इस रिपोर्ट को अपने रीडर्स तक पहुंचाने के लिए हमारे रिपोर्टर्स इन सभी 8 जगहों पर गए। उस दौर के साक्ष्यों को तलाशा। उनसे जुड़ी मान्यताओं और कहानियों की पड़ताल की। तस्वीरें कलेक्ट की। साथ ही इन जानकारियों को वहां के महंतों, इतिहासकारों और रामायण-वेद के जानकारों
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मानव की उत्पति का रहस्य और इतिहास

भारत देश का प्राचीन नाम आर्यावर्त है। आर्यावर्त के पूर्व इसका कोई नाम नहीं था। कहीं-कहीं जम्बूद्वीप का उल्लेख मिलता है। कुछ लोगों का मानना है कि इसे पहले ‘अजनाभ खंड’ कहा जाता था। अजनाभ खंड का अर्थ ब्रह्मा की नाभि या नाभि से उत्पन्न। लेकिन वेद-पुराण और अन्य धर्मग्रंथों के साथ वैज्ञानिक शोधों का
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धर्मग्रंथो में वर्णित 9 रहस्यमयी मणियां

नागमणि को भगवान शेषनाग धारण करते हैं। भारतीय पौराणिक और लोक कथाओं में नागमणि के किस्से आम लोगों के बीच प्रचलित हैं। नागमणि सिर्फ नागों के पास ही होती है। नाग इसे अपने पास इसलिए रखते हैं ताकि उसकी रोशनी के आसपास इकट्ठे हो गए कीड़े-मकोड़ों को वह खाता रहे। हालांकि इसके अलावा भी नागों
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प्राचीन वैदिक भारत की विश्व को देन

प्राचीन वैदिक भारत की विश्व को देन ——————————————- 1. जब कई संस्कृतिया 5000 साल पहले ही घुमंतू जंगली और खानाबदोश थी, तब भारतीय सिंधु घाटी (सिंधुघाटी सभ्यता) में हड़प्पा संस्कृति की स्थापना की | 2. बीज गणित, त्रिकोण मिति और कलन का अध्ययन प्राचीन भारत में ही आरंभ हुआ था | 3. ‘स्थान मूल्य प्रणाली’
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जानिए प्राचीन ऋग्वेद में प्रकाश की गति की गणना किस प्रकार की गयी है

प्रकाश की गति : ऋग्वेद माना जाता है की आधुनिक काल में प्रकाश की गति की गणना Scotland के एक भोतिक विज्ञानी James Clerk Maxwell (13 June 1831 – 5 November 1879) ने की थी । जबकि आधुनिक समय में महर्षि सायण , जो वेदों के महान भाष्यकार थे , ने १४वीं सदी में प्रकाश
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