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जानिए कैलाश पर्वत का रहस्य

मुण्डकोपनिषद् के अनुसार कैलाश पर्वत सूक्ष्म-शरीरधारी आत्माओं का एक संघ है। इनका केंद्र हिमालय की वादियों में उत्तराखंड में स्थित है। इसे देवात्मा हिमालय कहा जाता है। इन दुर्गम क्षेत्रों में स्थूल-शरीरधारी व्यक्ति सामान्यतया नहीं पहुंच पाते हैं। अपने श्रेष्ठ कर्मों के अनुसार सूक्ष्म-शरीरधारी आत्माएं यहां प्रवेश कर जाती हैं।

इसे दुनिया का सबसे बड़ा रहस्यमयी पर्वत माना जाता

इतिहास के ये सात व्यक्ति आज भी जिन्दा है

श्लोक : ‘अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः नमो नमः॥’ अर्थात् : अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सभी चिरंजीवी हैं, इन्हें नमस्कार है। 1. बलि : राजा बलिके दानके चर्चे दूर-दूर तक थे। देवताओं पर चढ़ाई करके राजा बलिने इंद्रलोक पर अधिकार कर लिया था। बलि सतयुगमें भगवान
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जीवाणुओं - विषाणुओं का महाभारत में उल्लेख

जीवाणुओं – विषाणुओं का महाभारत में उल्लेख . Bacteria – Viruses mentioned in The Mahabharata अवध्यः सर्वब्रह्मभूता अन्तरात्मा न संशयः अवध्ये चात्मनि कथं वध्यॊ भवति केन चित !!१!! यथा हि पुरुषः शालां पुनः संप्रविशेन नवाम एवं जीवः शरीराणि तानि तानि परपद्यते !!२!! देहान पुराणान उत्सृज्य नवान संप्रतिपद्यते एवं मृत्युमुखं पराहुर ये जनास कर्मफलर्दर्शिनः !!३!! ये
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वेद की दिव्यता देखिये, और दुसरों को भी दिखाइये.. शेयर करें 1- आग, कर्ज और शत्रु यदि किंचित मात्र भी शेष रह जाते हैं तो फिर से बढ़ जाते हैं, इसलिए उन्हें पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए। 2- पृथ्वी में तीन रत्न हैं – जल, अन्न और सुभाषित, किन्तु मूर्ख जन पत्थर के
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